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सौंदर्य


ताड़केश्वर धाम को एक पवित्र स्थल माना जाता है ओर यह पवित्र स्थल है भी। इस स्थल मे आप अपना ध्यान केंद्रित कर सकते हो। यहा स्नान करने के लिए खुला पूल है जो की पुरूषो के लिए है ओर एक बन्द पूल है जो कि महिलाओं के लिए है। यह सब लक्ष्मी माता की भेंट है। यह पर एक पानी का कुण्ड है। इसका पवित्र जल को शिवलिंग मे अर्पित किया जाता है । मन्दिर के उपयोग मे भी कुण्ड का पानी इस्तेमाल किया जाता है। भक्त लोग मंदिर मे घंटिया भेंट करते है। और जिनकी नयी शादी हुई होती है वह पुत्र की प्राप्ति के लिये घंटी भेंट करते है। इन घंटियों को एक अलग कमरे मे लटकाया जाता है ओर जब कमरा भर जाता है तब इन्हें रास्तो मे लगा दिया जाता है।

वातावरण


ताड़केश्वर मंदिर के आस पास क़ोई खाद्य भंडार उपलब्ध नही है। खाद्य सामग्री आप कोटद्वार से ला सकते हो क्योंकि आसपास कोई सुविधा नहीँ। एक कथा के अनुसार कहाँ जाता है कि देवी पार्वती माँ ने 7 देवदारों के वृक्षो मे खुद को बदल दिया था ताकि भगवान शिव के स्थान मे छाया देने मे सहायक हो। देवदार के वृक्षो को ग्रोव के आकार यानि हिन्दी मे ओम् के रूप मे माना जाता है। और तभी यहाँ का नाम ताड़केश्वर संम्मानित हुआ मन्दिर मे शिवलिंग की जगह देवता की मूर्ति स्थापित की गई है। इस मन्दिर मे देवी की शक्तियां समर्पित है। जो कि अभी तक है। यहाँ परिसर मे एक हवन कुण्ड भी है। तीर्थयात्री प्रार्थना के लिए बहुत दूर दूर से यहां आते है। ग्रामीण लोग अपनी फसल पहले मन्दिर मे चढाते है ।







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